परिचय

प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्‍या 153.16 लाख (जनगणना 2011 के अनुसार) जो कि राज्‍य की कुल जनसंख्‍या का 21.10 प्रतिशत है, इस प्रकार मध्यप्रदेश देश का ऐसा राज्य है, जहाँ हर पांचवा व्यक्ति अनुसूचित जनजाति वर्ग का है। इन वर्गों के कल्याण एवं विकास को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश की आयोजना मद का 21.10 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जनजाति उपयोजना की अवधारणा के तहत पृथक से प्रावधानित किया जाता है।

अनुसूचित जनजातियों के लिए विभिन्न विकास विभागों द्वारा तैयार की जाने वाली योजनाओं तथा उनके लिए निर्धारित बजट का नियन्त्रण भी विभाग के पास है। इस प्रकार आदिवासी उपयोजना के लिए विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। राज्य आयोजना में प्रावधानित आदिवासी उपयोजना सब स्कीम मद में प्रावधानित बजट राशि का बंटवारा राज्य आयोजना आयोग एवं संबंधित विकास विभागों के परामर्श से जनजातियों के लिए चिन्हांकित की गई उपयोगी योजनाओं हेतु किया जाता है।

शैक्षणिक स्तर एवं आर्थिक सुदृढ़ता किसी भी वर्ग की सामाजिक स्थिति की पहचान होते हैं। इसलिए विभाग का लक्ष्य अनुसूचित वर्गो का शैक्षणिक एवं आर्थिक उत्थान कर उन्हें समाज के अगले पायदान पर लाना हैं । मध्यप्रदेश ऐसा राज्य है, जहाँ आदिवासी विकासखण्डों में शिक्षा का संचालन जनजातीय कार्य विभाग द्वारा किया जाता है।

मध्यप्रदेश के 89 आदिवासी विकासखण्डों में प्राथमिक शिक्षा से लेकर हायर सेकेण्डरी तक की शिक्षा का दायित्व विभाग के पास है। इन विकासखण्डों में नवीन शैक्षणिक संस्थाओं को खोलना, पदों का निर्माण तथा नियन्त्रण विभाग द्वारा किया जाता है। विभाग द्वारा जनजाति छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्तियाँ स्वीकृत एवं वितरण करने के साथ-साथ समस्त छात्रावास/आश्रमों एवं अन्य आवासीय संस्थाओं का संचालन भी किया जा रहा है। जिसमें जनजाति वर्ग के बालक एवं बालिका निवास कर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्र-छात्राओं को शिक्षण के साथ निःशुल्क आवास, भोजन, स्वच्छ पेयजल, विद्युत आदि की सुविधा देने के उद्देश्य से आश्रम शालायें,जूनियर, सीनियर, सीनियर-उत्कृष्ट, महाविद्यालयीन छात्रावासों तथा विशिष्ट आवासीय संस्थाओं का संचालन किया जा रहा है, जिसमें लाखों विद्यार्थी लाभांवित हो रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विद्यार्थियों की प्राथमिक स्तर से उच्च स्तर तक की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

मध्यप्रदेश पहला ऐसा राज्य है जहाँ जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 का प्रभावी क्रियान्वयन कर 2,21,777 अनुसूचित जनजाति वर्ग दावेदारों के अधिकार मान्य किये गये हैं। मध्यपदेश में अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 का प्रभावी कियान्वयन किया गया है । राज्य सरकार का यह संकल्प है कि एक भी पात्रताधारी वन निवासी वन अधिकार से वंचित न रहे । अधिकार धारकों को कृषि प्रयोजन संबंधी अन्य सुविधाऐं उपलब्ध कराने की ओर राज्य सरकार अग्रसर है ।

विभाग द्वारा जनजातीय परम्परागत संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु राज्य स्तरीय जनजातीय संग्रहालय का निर्माण भोपाल में कराया गया है। सामुदायिक रेडियो केन्द्रों की स्थापना कराई गई है, जिससे प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों तक उनकी तरक्की के लिए राज्य द्वारा संचालित प्रवर्तित योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जा सके।

जनजातियों पर होने वाले अत्याचारों के प्रभावी नियन्त्रण हेतु लागू किये जाने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के लिए भी विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। इस प्रकार प्रदेश में निवासरत जनजाति वर्ग के चहुँमुखी विकास हेतु दृढ़ सं‍कल्पित है।