विशेष पिछड़ी जनजाति समूह- PVTG

प्रदेश में तीन विशेष पिछड़ी जनजाति यथा भारिया, बैगा एवं सहरिया निवासरत हैं। राज्य शासन द्वारा 11 विशेष पिछड़ी जनजाति विकास अभिकरणों का गठन किया गया है। जो मण्डला, बैहर (बालाघाट), डिण्डौरी, पुष्पराजगढ़ (अनुपपुर) शहडोल, उमरिया, ग्वालियर, (दतिया जिला सहित), श्योपुर (भिण्ड, मुरैना जिला सहित) शिवपुरी, गुना (अशोकनगर जिला सहित) तथा (तामिया जिला छिन्दवाड़ा) में स्थित है। इन अभिकरणों में चिन्हांकित किए गए 2314 ग्रामों में विशेष पिछड़ी जनजाति के 5.51 लाख व्यक्ति निवास करते हैं।

चिन्हांकित क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों हेतु योजनाओं के बनाने, क्रियान्वयन, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन हेतु गवर्निंग बाडी के गठन का प्रावधान है। जिसमें विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के सदस्यों को ही अध्यक्ष एवं संचालक मण्डल के सदस्यों के रूप में शासन स्तर से दो वर्षों के लिए मनोनीत किया जाता है। संचालक मण्डल में अभिकरण क्षेत्र से संबंधित आदिवासी विधायक/जिला पंचायत अध्यक्ष एवं जनपद पंचायतों के अध्यक्षों को सदस्यों के रूप में रखा जाता है। संबंधित अभिकरण के परियोजना प्रशासक/सहायक आयुक्त/जिला संयोजक सदस्य सचिव के रूप् में कार्य सम्पादित करते हैं।

बैगा, भारिया एवं सहरिया प्राधिकरण

  • सहरिया जनजाति विकास प्राधिकरण
  • बैगा जनजाति विकास प्राधिकरण
  • भारिया जनजाति विकास प्राधिकरण  

इन प्राधिकरणों से संपूर्ण राज्य मे सामाजिक विकास संभव होगा । इन नवगठित राज्य स्तरीय प्राधिकरणों से इन्ही जातियों का एक अध्यक्ष, तीन अशासकीय सदस्य (मनोनित) होंगे । वित्त पंचायत एवं ग्रामीण विकास , लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संशाधन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, स्कूल शिक्षा, कृषक कल्याण, उघानिकी, वन तथा जनजातीय कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव/ सचिव शासकीय सदस्य हैं । प्राधिकरणों के अध्यक्षों एवं अशासकीय सदस्यों को राज्य शासन द्वारा मानदेय तथा अन्य सुविधाए प्रदाय होंगी। इन प्राधिकरणें के कार्य क्षेत्र में वर्तमान में संचालित क्षेत्रीय अभिकरण तथा राज्य के विभिन्न जिलों में निवासरत समस्त विशेष पिछडी जनजाति (बैगा, भारिया तथा सहरिया) सम्मिलित है इन प्राधिकरणों के गठन से इन समाज के व्यक्तियों को राज्य स्तर पर नीतिगत निर्णयों एवं राजनीतिक विषयों पर निर्णय हेतु प्रतिनिधित्व मिलेगा जिससे विभिन्न विकास एवं कल्याणकारी विभागों में बेहतर समन्वय एवं अभिकरण सुनिश्चित होगा । अभिकरणों के कार्य क्षेत्र के बाहर विशेष पिछड़ी जनजाति हेतु संचालित योजनाओं के संबंध प्राधिकरण आवश्यक अनुशंसा कर सकेगा ।